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Friday, March 4, 2016

बेहतरीन हृदयस्पर्शी शेरो-शायरी : गली, कूचा

बेहतरीन हृदयस्पर्शी शेरो-शायरी : गली, कूचा
BEST HINDI SHAYRI COLLECTION  

मैं ख़ुद भी एहतियातन इस गली से कम गुजरता हूं,
कोई मासूम क्यों मेरे लिए बदनाम हो जाए।
-- बशीर बद्र
निकलना ख़ुल्द से आदम का सुनते आए थे लेकिन,
बड़े बे आबरु होकर तेरे कूचे से हम निकले।
-- ग़ालिब
कूचे को तेरे छोड़कर जोगी ही बन जाएं मगर,
जंगल तेरे, पर्वत तेरे, बस्ती तेरी, सहरा तेरा।
-- इब्ने इंशा
उनकी गली में जिस दम पहुंचा मेरा जनाजा,
हसरत से देखते थे पर्दा उठा उठा के
-- ज़ाकिर देहलवी
हां वो नहीं ख़ुदा परस्त जाओ वो बेवफ़ा सही,
जिसको हो दीनो-दिल अज़ीज़ उसकी गली में जाएं क्यों।
-- ग़ालिब
जब मैं चलता हूं तेरे कूचे से कतरा के कभी,
दिल मुझे फेरके कहता है उधर को चलिए
-- मीर हसन


Sunday, July 20, 2014

बेस्ट शायरी


बेस्ट शायरी 

दालानों की धूप, छतों की शाम कहां,
घर से बाहर घर जैसा आराम कहां।
दिनभर सूरज किसका पीछा करता है,
रोज पहाड़ी पर जाती है शाम कहां।
-- बशीर बद्र

पुराने लोग नया हौसला तो क्या देंगे,
मगर बुजुर्गों से मिलते रहो दुआ देंगे।
हरेक काम सलीके से बांट रक्खा है,
ये लोग आग लगायेंगे, ये हवा देंगे।
-- डॉ. अख्तर नज्मी

जागती आंखों से भी देखो दुनिया को
ख्वाबों का क्या है वो हर शब आते हैं
कागज की कश्ती में दरिया पार किया
देखो हम को क्या क्या कमाल आते हैं।
-- शहरयार


Sunday, April 6, 2014

बशीर बद्र - गजल


Bashir Badra - Gazal

तेरा हाथ मेरे कंधे पर दरिया बहता जाता है
कितनी ख़ामोशी से दुःख का मौसम गुजर जाता है
पहले ईंट फिर दरवाजे अबके छत की बारी है
याद नगर में एक महल था, वो भी गिरता जाता है
अपना दिल है एक परिंदा जिसके बाजू टूटे हैं
हसरत से बादल को देखे, बादल उड़ता जाता है
सारी रात बरसने वाली बारिश का मैं आंचल हूं
दिन में कांटो पर फैलाकर मुझे सुखाया जाता है
हमने तो बाजार में दुनिया बेची और खरीदी है
हमको क्या मालूम किसी को कैसे चाहा जाता है।
                                                 -- बशीर बद्र

Saturday, September 10, 2011

शायरी SMS :- हर रोज हमें मिलना, हर रोज बिछड़ना है...


"हर रोज हमें मिलना, हर रोज बिछड़ना है,
मैं रात की परछाई , तू सुबह का चेहरा है."
-- बशीर बद्र