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Tuesday, July 15, 2014

निदा फ़ाजली : शेरो-शायरी


बेनाम सा ये दर्द क्यूं नहीं जाता,
जो बीत गया है वो गुजर क्यूं नहीं जाता।
सब कुछ तो है क्या ढूंढती रहती है निगाहें,
क्या बात है मैं वक्त पे घर क्यूं नहीं जाता।
वो एक ही चेहरा तो नहीं सारे जहां में,
जो दूर है वो दिल से उतर क्यों नहीं जाता।
                         -- निदा फ़ाजली 


Monday, August 12, 2013

शेरो-शायरी :- दुष्यंत कुमार ( SHERO SHAYRI - DUSHYANT KUMAR) :-


शेरो-शायरी :- दुष्यंत कुमार ( SHERO SHAYRI - DUSHYANT KUMAR)
हिन्दी शायरी एस.एम.एस. (HINDI SHAYRI SMS) :-

कौन कहता है कि आसमान में सुराख़ नहीं हो सकता,
एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो।
                                              -- दुष्यंत कुमार